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रविवार, 29 मई 2011

पंचायतो से अविश्वास प्रस्ताव के अधिकार छिनना असवैधानिक - सुप्रीम कोर्ट


सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि निर्वाचित प्रतिनिधि कोहटाने के लिए 'अविश्वास प्रस्ताव की व्यवस्था लोकतांत्रिकप्रणाली का अभिन्न हिस्सा है और इसके साथ किसी प्रकारकी छेड़छाड़ असंवैधानिक होगी। न्यायालय का मानना है किकिसी सरपंच को पद से हटाने के लिए पंचायत सदस्यों कोअविश्वास प्रस्ताव पारित करने के अधिकार से वंचित करनाउचित नहीं होगा।

न्यायमूर्ति जी. एस. सिंघवी और न्यायमूर्ति चंद्रमौलि कुमार प्रसाद की अवकाशकालीन खंडपीठ ने इस तरहकी तीखी टिप्पणी के साथ शुक्रवार को पंचायती राज कानून में संशोधन निरस्त करने के हाईकोर्ट के फैसले केखिलाफ पंजाब सरकार की याचिका खारिज कर दी। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पिछले महीने ही पंजाबपंचायती राज कानून संशोधन कानून को असंवैधानिक करार देते हुए इसे निरस्त कर दिया था। न्यायाधीशों नेकहा कि सरपंच को पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव का अधिकार निर्वाचित सदस्यों से लेकर इसेनौकरशाही को देने से पंचायती राज व्यवस्था में निरंकुशता व्याप्त हो जाएगी। इस तरह के किसी भी प्रावधानसे संविधान के अनुच्छेद 14 में प्रदत्त समता के अधिकार का हनन होता है। न्यायालय ने कहा कि अविश्वासप्रस्ताव का अधिकार नौकरशाहों के हाथ में देना उचित नहीं होगा, क्योंकि ऐसा करने से बेहद खतरनाकस्थिति पैदा हो सकती है।
पंजाब सरकार पंचायती राज कानून में संशोधन करके साथ ही इसे पिछले साल एक जुलाई से लागू करनाचाहती थी। प्रस्तावित संशोधन के तहत कम से कम दो साल तक किसी भी सरपंच को अविश्वास प्रस्ताव केमाध्यम से हटाया नहीं जा सकता था। इसके बाद यदि किसी सरपंच को हटाया भी जाता है तो इसके लिए खंडविकास अधिकारी या उसके समकक्ष अधिकारी के समक्ष आवेदन करना होगा।
इस संशोधन से पहले पंचायती राज कानून की धारा आठ के तहत किसी भी पंचायत के दो तिहाई सदस्यों द्वारासरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित करने पर उसे पद से हटाया जा सकता था। लेकिन संशोधन केबाद पंचायत के सदस्यों को सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की मंशा व्यक्त करते हुए खंड विकासअधिकारी के समक्ष एक अर्जी देनी होगी। न्यायाधीशों ने कहा कि इस प्रकार के संशोधन का मतलब तो यही हैकि भ्रष्टाचार के आरोपों में किसी सरपंच के लिप्त होने के बावजूद निर्वाचित सदस्य अविश्वास प्रस्ताव केमाध्यम से उसे हटा ही नहीं सकेंगे। इस तरह के प्रावधान को मंजूरी देने का मतलब लोकतांत्रिक व्यवस्था कीमूल भावना को ही खत्म करना है।

8 टिप्‍पणियां:

  1. shri man ji panchayti raj me sarpanch ka chunav janta ke vote se kiya jata h to hatane ka adhikar vard pancho ka nahi hona chahiye q ke kisi gram panchayat me mana ke 3500 voter h aor 7 candidete ne chunav lada to kariban 1000 vote lane wala elected ho jayega baki ke jo 2500 ke voter sankhya h vo kisi halat me sarpanch se santust nahi ho payegi aor vo log sada achha kam karane par bhi sarpanch ke sikayat karte rahenge

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    1. Bhai ek Recall process bhi hai. Vo use kre (right to recall) sarpanch or panch ko htane ki prakriya

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  2. good evening sir mera naam sahil kumar hai or main jammu and kashmir and distt kathua se hu sir meri raye hai ki jo bi sarpanch banta hai toh kiske budolat banta hai janta ke badolat lekin vote lene ke baad jai log kam kyo ni krte hai jo paisa atta hai powerty person ke liye fir jai log kyo kha jate hai sara paisa sir muje thoda si knowledge chahiye ki main in ko sabak sikha saku plz sir

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  3. or muje sarpanch banne ke thodi si knowledge de main apka bahut abari rahung plz sir plz this is my id sir sahil.kumar@webners.com thanking you sir

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  4. मेरे गांव का सरपंच भृष्ट हे सचिव भी बहुत रुपया खा गए गाँव का गली बनाई भी नही पैसे खा गए सारे और अधिकारी भी सरपंच के साथ हे

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    1. आप अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से सरपंच और सचिव को हटा सकते है |
      तथा उसने जो भी गलत किया है उसका व्यौरा उसे देने के लिए बाध्य किया जा सकता है तथा हर्जाना भी
      आप मुख्य कार्य पालन अधिकारी से शिकायत कर सकते है, या सीधे सभुत के सेठ कलेक्टर के पास,भी
      www.facebook.com/inHindiINDIA

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  5. अगर कोई सरपंच ईमानदारी से काम करे और उसे पंच लोग पैसो के लिए हटा दे तो क्या करोगे

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  6. Mera prashna hai ki sarpanch ke khilaf to avishvas prastav hota hai kya pancho ke khilaf bhi avishvas prastav hota hai ki nahi aur kaun kar sakta hai

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